निम्नलिखित गद्यांश को पढिए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
रडयार्ड किपलिंग द्वारा 'व्हाइट मैन्स बर्डन' के विचार को 1899 में लिखी गई इसी शीर्षक की कविता के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया और बढ़ावा दिया गया। 1860 तक भारत में ब्रिटिश विस्तार पूर्ण हो चुका था। 'व्हाइट मैन्स बर्डन' की संकल्पना के एक शताब्दी पूर्व ही करनॉय इसका उपयोग अठारहवीं सदी में ब्रिटिश विस्तार के लिए प्रेरक कारक के रुप में करते हैं। करनॉय की धारणा के विपरीत मिशनरी प्रारंभ से ही स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए लड़ते थे। धारवाड़ जिले में एक कन्नड़ किसान की फाँसी को देखने के पश्चात् रेव. वी. टेलर 1836 में बॉम्बे प्रेसिडेन्सी में कन्नड़ को न्यायालय की भाषा के रूप में मान्यता दिलाने हेतु लड़े। उपनिवेश-पूर्व पेशवा शासन के कारण इस पूरे कन्नड़ भाषी जिले में ग्रामीण और जिला अधिकारी मराठी थे। औपनिवेशिक शासन में भी यही प्रणाली जारी रही। कन्नड़ किसान को फांसी इसलिए दी गई क्योंकि हत्या के आरोपी किसान ने अपने साक्ष्य कन्नड़ भाषा में रखे थे। इसे स्थानीय अधिकारी द्वारा मराठी में रिकॉर्ड किया गया और न्यायालय की कार्यवाही हिन्दुस्तानी में करायी गई। कैदी को न मराठी का ज्ञान था और न हिन्दुस्तानी का तथा उसने न चाहते हुए भी अपराध स्वीकार कर लिया। उसके विरुद्ध कोई परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं था। उस पर हत्या का आरोप लगाया गया था और उसे फांसी दे दी गई। टेलर ने प्रशासन और शिक्षा की भाषा के रूप में कन्नड़ को अपनाए जाने के लिए प्रभावी लड़ाई लड़ी। छः माह के भीतर कन्नड राज-काज की भाषा बनायी गई और जिले में सत्ताईस कन्नड़ माध्यम वाले प्राथमिक विद्यालय स्थापित किए गए।
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: करनॉय भारत में ब्रिटिश विस्तार के पक्ष में थे।
कथन II: करनॉय श्वेत लोगों की श्रेष्ठता में विश्वास करते थे।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए: