गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
संपूर्ण भारत में परिवर्तन का सवेग भारतीय युवावर्ग में उत्साह के रूप में परिलक्षित होता है। सिविल सोसायटी संगठनों का विकास, युवा विधि-निर्माताओं की आकांक्षाएं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के मूल में बाजार है। इस प्रकार पूरे भारत में परिवर्तन के संवेग को आशा की राजनीति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और यह कार्य बाजार की शक्ति करती है। हमें यह भी नोट करना चाहिए कि आशा की संभावना के बोध की स्पष्ट अभिव्यक्ति को बाजार द्वारा इस प्रकार संभव बनाया गया है कि भारतीय अपने बेहतर भविष्य की प्रत्याशा में अपना गांव छोड़कर अन्यत्र जा सकते हैं। इस प्रकार संतत प्रगति का आख्यान और भविष्य में आस्था व्यक्ति की उन स्वतंत्रताओं से अतः बद्ध होते हैं जो बाजार द्वारा प्रदान किए गए हैं। स्व-सहायता और बाजार में भागीदारी के माध्यम से संभव हुआ भविष्य में विश्वास नए अवसरों का समानार्थी है संभावनाओं के इस बोध को जब कल्याणकारी सेवा और जन सहयोग की पृष्ठभूमि में संस्थित किया जाता है तो यह नए सशक्त भारत की नई कल्पना के साथ असंगत पाया जाता है। भारत की गाथा यह है कि आर्थिक सुधारों के द्वारा मुक्त आकांक्षायें संभव हो पायीं। लोक कल्याण और जन समर्थन की राज्य-आधारित राजनीति के कारण इसमें और अधिक सुधार हुआ है भारतीय युवा वर्ग की प्रत्याशा उदारीकरण और बाजारू सुधार द्वारा परिलक्षित होती है। बाजार में होने वाले चमत्कार में ही भारत का भविष्य निश्चित है।