निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए-
धार्मिक नेताओं, विद्वानों या विजेताओं द्वारा परिस्थापन के कारण कतिपय भाषाओं को विशेष प्रस्थिति प्राप्त हुई। कभी-कभी वे सत्ता और विशेषाधिकार का आधार भी बन गई। लैटिन जैसी एक छोटी अल्पसंख्या द्वारा बोली जाने वाली भाषा मध्यकालीन यूरोप में विद्वता की, अभिलेख-अनुरक्षण की और धार्मिक अनुष्ठानों की भाषा बन सकी। विजेताओं, जो एक शासकीय और भूस्वामी अभिजात वर्ग बने, द्वारा परिस्थापित किसी भाषा का ही प्रयोग वाणिज्य, प्रशासन और विधि सम्बन्धित कार्यों में होना था। साम्राज्यवाद के युग में औपनिवेशिक शक्तियों की भाषाएँ ही उनके उपनिवेशों में भी प्रशासन, संहिताबद्ध कानून, उच्च शिक्षा, विज्ञान और तकनालजी की भाषाएँ बनीं। इससे उन पुरानी भाषाओं का विकास अवरुद्ध हो गया जो इन क्षेत्रों से बहिष्कृत रह गई। एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों में, जो अब स्वतंत्र हैं अंग्रेजी और फ्रांसीसी जैसी भाषाएँ, विविध आयतियों में अभी भी वही स्थिति बनाए हुए हैं। इससे इन राज्यों के अन्दर और पड़ोसी देशों के बीच में भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषतः पश्चिमी अफ्रीका और कैरेबियाइ क्षेत्रों में ये विभिन्न विदेशी शक्तियों की अधीनता से स्वतंत्र हुए हैं। शब्द मानव अनुभवों के प्रतीक होते हैं। उनमें अन्तर्निहित बोध समय के साथ और नई स्थितियों से प्रतिक्रिया के कारण परिवर्तित हुए हैं। साथ ही सभी भाषाएँ एक परिवर्तन की अवस्था में रहती हैं, कभी धीमी गति से तो कभी तीव्र गति से वे विचार और ज्ञान के क्षेत्र में, उत्पादक तकनीकों में, सामाजिक सम्बन्धों में, राजनैतिक और आर्थिक संरचनाओं में होने वाले विकासों से उत्पन्न नई आवश्यकताओं के प्रत्युत्तर में विकसित होती हैं। इसलिए शब्द अपने अर्थ बदलते हैं और नए अनुप्रयोग अर्जित करते हैं। विशिष्टीकृत तकनीकी शब्दावलियाँ सामान्य उपयोग में आ जाती हैं और नए शब्द आविष्कृत होते हैं। यह प्रक्रिया हमें स्मरण दिलाती है कि भाषा अधिगम का संग्रह मात्र नहीं है बल्कि मानवीय प्रयोजनों के अनुकूल होने वाला एक उपकरण है।