निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दीजिए:
भारतीय शासकों, विशेषकर बंगाल के पाल तथा सेन शासकों और दक्षिण भारत के पल्लव और चोल शासकों ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का प्रयास किया।
चोल शासक राजेंद्र I ने मलय तथा पड़ोसी देशों के विरुद्ध एक नौसैनिक अभियान भेजा ताकि चीन के साथ व्यापार में उनके हस्तक्षेप को रोका जा सके।
इस बात के प्रमाण हैं जो दर्शाते हैं कि दक्षिण भारत, उड़ीसा तथा बंगाल में अनेक पोत कारखाने थे जो पोतों का निर्माण करते थे। ऐसे पोत कारखाने गुजरात सहित पश्चिमी तट पर भी स्थित थे। इस क्षेत्र में भारत के विदेश व्यापार में विकास मजबूत नौसैनिक परंपरा पर आधारित था जिसमे पोत निर्माण तथा मजबूत नौसेना और इसके व्यापारियों का कौशल तथा उद्यम भी शामिल था। व्यापार में संलग्न देशों के लिए चीन के साथ व्यापार इतना अनुकूल था कि उन्नीसवीं शताब्दी में चीन सरकार ने चीन से सोने तथा चाँदी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया। धीरे-धीरे भारतीय पोतों के स्थान पर अरब के तथा चीन के पोत दिखाई देने लगे जो अपेक्षाकृत बड़े तथा तेज चलने वाले होते थे। ऐसी जानकारी है कि चीनी पोत कई मंजिलों वाले ऊंचे होते थे तथा वे 400 सैनिकों के अतिरिक्त 600 यात्रियों को लेकर चलते थे। चीनी पोतों के विकास का एक महत्त्वपूर्ण कारक प्रारंभिक दिशासूचक यंत्र का उपयोग था। बाद में इस आविष्कार का उपयोग चीन के बाद पश्चिम में होने लगा ।
भारत में पोत कारखाने कहाँ स्थित थे?
A. बंगाल
B. उड़ीसा
C. दक्षिण भारत
D. गुजरात
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: