निम्नांकित गद्यांश को पढ़िए एवं प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
हाल ही में नव स्वतंत्र होने वाले राष्ट्रों में जनसमूह के स्तर पर निर्धनता और राजनैतिक अनिश्चितता दोनों के अंत करने हेतु आर्थिक विकास अपेक्षित था। तीव्र आर्थिक विकास की अपेक्षा न केवल जीवन स्तर को ऊपर उठाने हेतु आवश्यकता थी अपितु राष्ट्रीय एकजुटता को बनाए रखने के लिए भी इसकी आवश्यकता थी। इस बात को लेकर मोटे तौर पर लोगों में आम सहमति थी तथापि औपनिवेशिक सत्ता के बाद अपनायी गयी अथवा अस्वीकृत नीतियों में परिवर्त्य को स्वीकार्य किया गया। जहाँ साम्यवादियों का शासन था वहाँ उद्योगों के राष्ट्रीयकरण और निजी क्षेत्र की उत्पादन ईकाइयों को बंद करने की मुहिम चलायी गयी। इसी क्षेत्र में पारिवारिक खेती को हतोत्साहित किया गया तथापि गैर-साम्यवादी देशों में भी औद्योगिक उत्पादन में शासन की प्रमुख भूमिका थी। तथापि कृषि क्षेत्र निजी हाथों में ही रहा, कुछ देशों ने भू-धारिता को अक्षुण्ण रखने की सामंती व्यवस्था का परित्याग किया, अन्य देशों ने किराएदार अथवा बटाईदार को स्वामित्व का अधिकार दे दिया। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार और पूंजी प्रवाह के मामले में भी विभिन्नताएं थीं। कुछ देशों ने अपने स्वयं के उद्योगों को बाह्य देशों की प्रतिस्पर्धा से संरक्षित रखने के लिए टैरिफ (प्रशुल्क) की दरों में अत्यधिक वृद्धि कर दी। अन्य देशों ने अपेक्षाकृत अधिक लचीले व्यापार तंत्र को अपनाया और इस क्रम में विदेशी माल और पूंजी को चयनित रूप में ही अपने भूभाग में प्रविष्ट होने की अनुमति दी। आधुनिक एशियाई राष्ट्रों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटक विदेश नीति है। साम्यवादी दलों द्वारा शासित देशों ने सोवियत संघ के साथ मैत्री की जबकि अन्य एशियाई देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मैत्री की। परवर्ती देश पश्चिमी देशों की वित्तीय एवं तकनीकी सहायता से आकर्षित हुए। फिर भी अन्य देशों ने गुट निरपेक्ष मार्ग को अपनाने का विकल्प चुना और न तो रूस, न ही अमेरिका के साथ गहन तादात्म्य स्थापित किया।