नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: अरस्तू का न्याय वाक्य निगमन और आगमन को अविभाज्य रूप से संबंधित मानता है।
कथन II: शास्त्रीय भारतीय दर्शनशास्त्र का न्याय मत निगमन और आगमन को एक ही प्रक्रिया के दो पक्षों के रूप में मानता है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
1
कथन I और II दोनों सही हैं।
2
कथन I और II दोनों गलत हैं।
3
कथन I सही हैं, लेकिन कथन II गलत है।
4
कथन I गलत है, लेकिन कथन II सही है।