निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
चित्रल पर अफगानिस्तान का दवाब जो कि 1876 के उत्तरार्ध में कश्मीर के प्रति इसकी निष्ठा के कारण भारतीय साम्राज्य के अत्यधिक निकट पहुंच गया था, वर्ष 1882 में गंभीर हो गया क्योंकि अफगानिस्तान ने इस भूभाग पर अपने एक संरक्षित राज्य के रूप में दावा किया। यद्यपि भारत सरकार ने इस दावे का तत्काल खंडन किया, चित्रल में और उसके चारों ओर कथित रूसी जटिल कथानकों से चिंता और बढ़ गयी। कश्मीर में नव स्थापित रेजीडेन्ट न तो दरबार पर नियंत्रण कर सका और न ही ब्रिटिश भारतीय सरकार हुन्जा तथा नागर के अशांत नायकत्व पर नियंत्रण कर सकी।
वर्ष 1885 के पंजडेह संकट से भी उत्तर पश्चिम सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा हेतु व्यापक प्रबंध करने की आवश्यकता के संबंध में ब्रिटिश सेना के विचार ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिली। अतः यह केवल संयोग नहीं था कि वर्ष 1885 में दो खोजी मिशन एक कर्नल लोरवार्ट डिपुटी क्वार्टर मास्टर जेनरल ऑफ इंडिया के नेतृत्व में गिलगिट तथा चित्रल होते हुए हिंदु कुश के दक्षिण की भूमि का सर्वेक्षण करने तथा दूसरा चीनी तुर्किस्तान तथा पामीर की ओर जे एलियास के नेतृत्व में सर्वेक्षण करने के लिए भेजे गये थे। इसी बीच श्रीनगर- रावलपिंडी कार्ट रोड को गिलगिट तथा चित्रल तक बढ़ाये जाने के संबंध में रक्षा समिति की सिफारिशों को डफरिन ने अनुमोदित किया था। नये कमांडर इन चीफ, एफ राबर्टस ने यह भी सुझाव दिया कि हमें चित्रल तथा गिलगिट के चारों ओर स्थित देश पर राजनीतिक नियंत्रण करना होगा ताकि दोरा दर्रा द्वारा चित्रल तक की पहुंच तथा वाखन द्वारा गिलगिट तक की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।