Comprehension Passage

निम्नांकित गद्यांश को पढ़ें और प्रश्न का उत्तर दें:

विश्व में विकल्पों की कमी नहीं है। वस्तुत: कमी इस बात की है विकल्पों के बारे में वैकल्पिक चिंतन नहीं उपलब्ध है। जब कभी भी ऐसा कहा जाता है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरीका में बहुत रोचक घटनाएं घटित हो रही हैं, पश्चिमी देशों का प्रत्युत्तर है कि विकसित देशों में इस तरह की समस्या नहीं है। इस प्रकार, पश्चिमी देशों को इस प्रकार के समाधानों की आवश्यकता नहीं है। इससे दो निष्कर्ष निकलते हैं: प्रथमतः विश्व की समझ पश्चिमी देशों की विश्व के बारे में समझ की तुलना में बहुत अधिक व्यापक है। इसका अभिप्राय यह है कि विश्व का उत्तरोत्तर रुपांतर उन तरीकों से भी हो सकता है जिसके संबंध में पश्चिमी देशों के चिंतन में पूर्वानुमान नहीं किया गया है। इसमें पश्चिमी देशों का आलोचनात्मक चिंतन सम्मिलित है। द्वितीयतः विश्व की विविधता अपरिमित है। यह ऐसी विविधता है जिसमें अति विशिष्ट प्रकार के अस्तित्व, चिन्तन और अनुभव, काल की संकल्पना निर्माण और मानव के मध्य संबंध और मानव एवं मानव के अतिरिक्त अन्य जीवों के बीच संबंध की विधियां, भूत और भविष्य का सामना करने और सामूहिक रूप से जीवन को संगठित करने, माल उत्पादन और सेवाओं के साथ- साथ अवकाश की विधियाँ समाहित हैं। जीवन, सुख और विश्व के साथ अन्तः क्रिया के विकल्पों की व्यापकता अधिकार व्यर्थ हो जाती है क्योंकि विश्व के उत्तरी देशों में विकसित सिद्धांत और अवधारणाओं ने जो समग्र शैक्षिक जगत में भी प्रयुक्त होती हैं. इस तरह के विकल्पों को नहीं पहचाना है। जब वे ऐसा करती हैं तो वे बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में वैध योगदान के रुप मे इनका मूल्य-वर्धन नहीं करती हैं। दक्षिण के ज्ञान को अनद्यतन (पुराना) होने की संज्ञा दी जाती है और इसे तनिक भी ज्ञान नहीं माना जाता है।

पश्चिमी देशों के सिद्धांत और उनकी संकल्पनाओं ने

1
वैकल्पिक ज्ञान को अस्वीकृत कर दिया है।
2
दक्षिण के ज्ञान का मूल्यवर्धन किया है।
3
एकल ज्ञान आधारित विश्व के सृजन का समर्थन किया है।
4
जीवन और अन्तः क्रिया की वैकल्पिक विधियों की व्यापकता को पहचाना है।

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