निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
एशिया और अफ्रीका की साम्राज्यवादी विजय की प्रक्रिया के साथ-साथ यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच उत्कट प्रतिद्वंद्विता और संघर्ष भी जारी थे। उपनिवेशों पर प्रतिस्पर्धी दावे प्रायः युद्ध की स्थिति उत्पन्न करते थे। हालाँकि, इनमें से अधिकांश संघर्षों को यूरोप के सम्मलेन कक्षों में सुलझा लिया जाता था और युद्ध टल जाते थे। यूरोपीय शक्तियाँ, कुछ प्राप्त करने के एवज कुछ देकर 'प्रतिदान' या 'कुछ के स्थान पर कुछ के आधार पर अपने प्रतिद्वंद्वियों के दावों - कौन-सा देश कौन सा क्षेत्र अधिग्रहण करेगा - का समाधान करती थीं।
उदाहरण के लिए वर्ष 1904 में प्रतिद्वंद्वी दावों, जिसने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने तक पहुँचा दिया था, की लम्बी अवधि के बीत जाने पर ब्रिटेन और फ्रांस ने एक गुप्त समझौता किया जिसके द्वारा ब्रिटेन को मिस्र में कुछ भी करने की स्वतंत्रता दी गई और इसके एवज में मोरक्को, फ्रांस को दिया जाना था। जब जर्मनी को इसके बारे में जानकारी मिली तो उसने फ्रांस से मोरक्को पर अपने दावे का परित्याग करने की माँग की। इसके बाद अनेक अंतर्राष्ट्रीय संकट उत्पन्न हुए, जिनसे यूरोप युद्ध के मुहाने पर पहुँच गया। मोरक्को के मुद्दे का समाधान अंततः वर्ष 1911 में हुआ जब फ्रांस, फ्रांसीसी कांगो का एक हिस्सा जर्मनी को देने पर सहमत, हुआ और जर्मनी ने फ्रांस को सूचित किया कि वह मोरक्को में अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी कर सकता है। इन संकटों के पैदा होने या उनका समाधान किये जाने में, फ्रांसीसी कागो या मोरक्को के लोगों को कुछ भी कहने का अधिकार नहीं था जिनके राज्य क्षेत्र के लिए सौदेबाजी हो रही थी।
नीचे दो कथन दिए गए हैं
कथन I: अफ्रीकी उपनिवेशों पर प्रतिस्पर्धी दावों का समाधान आमतौर पर यूरोपीय शक्तियों के बीच युद्ध द्वारा किया जाता था।
कथन II : मोरक्को को लेकर फ्रांस का केवल ब्रिटेन से संघर्ष था।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: