निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
वर्ष 2008 में प्रारम्भ हुए वैश्विक वित्तीय संकट ने एक प्रमुख ऋण संकट से लगभग शीघ्र ही यूरोप को आघात पहुंचाया।
यूरोजोन के अनेक देशों के कर्जदारों ने बड़े पैमाने पर ऋण लिए थे और उन्हें चुकाने मे असमर्थ प्रतीत हो रहे थे।
यूरोजोन के चार मुख्य कर्जदार यूनान (ग्रीस), आयरलैंड, पुर्तगाल और स्पेन थे। स्पेन और आयरलैंड में घर परिवारों ने आवासीय और निर्माण क्षेत्र के बाजार में आई तेजी (बूम) के वित्तपोषण के लिए भारी मात्रा में ऋण प्राप्त किए। जब आवासों की कीमतें ढह गई तो इन दोनों राष्ट्रों की सरकारों ने अपने राष्ट्रीय बैंकों को बचाने हेतु वित्तपोषण और अपनी अर्थव्यवस्थाओं में उद्दीपन के लिए विदेश से बड़े पैमाने पर ऋण लेना प्रारम्भ किया। लेकिन, यूरोजोन के निर्माण के बाद से ही यूनान बजटीय घाटे का सामना कर रहा था और उसकी सरकार इस कमी की पूर्ति के लिए विदेशी ऋण पर अत्याधिक आश्रित हो रही थी पुर्तगाल इसमें कहीं बीच की स्थिति में था। दोनों घर परिवार और सरकार भारी मात्रा में ऋण ले रही थीं। यूरोजोन के कर्जदारों की कठिनाईयां न केवल उनकी एक समस्या थी क्योंकि प्रमुख उत्तरी यूरोपीय वित्तीय संस्थाओं और निवेशकों ने अधिकाशतः ये ऋण दिए थे। यदि कर्जदार अपनी अदागियां नहीं कर पाते तो उत्तरी यूरोपीय बैंकों, निवेशकों द्वारा प्रदत्त खरबों डालर के ऋणों और पेंशन फंड की बुरी स्थिति हो गई होती। अनेक डूबते ऋणों और निवेशों के बोझ ने सर्वाधिक धनाढ्य यूरोपीय दोशों, विशेषकर जर्मनी और फ्रांस तक की वित्तीय व्यवस्थाओं की अक्षतता को गंभीर खतरे में डाल दिया था। इस सप्रभु ऋण संकट से संप्रभु कर्जदारों और उनके ऋणदाताओं दोनों और, वास्तव में सम्पूर्ण यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो गया था।
नीचे दो कथन दिए गए है:
कथन I: ऋण संकट ने सर्वाधिक धनाढ्य यूरोपीय देशों को प्रभावित नहीं किया।
कथन II: ऋण संकट ने केवल कर्जदारों के लिए खतरा उत्पन्न किया।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए।