Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

समृद्ध और निर्धन दोनों देशों में मूल निवासी या स्वदेशी जन सामान्यतया विश्व में सबसे कम सामर्थ्यवान, सर्वाधिक उपेक्षित समूह हैं। प्रारूपिक रूप से शक्तिशाली बाह्यमूल के निवासियों द्वारा अधिग्रहित किसी क्षेत्र के मूल निवासियों के वंशज अपने देश की प्रधान भाषा, संस्कृति, धर्म और नस्ली समुदायों से भिन्न हैं I विश्व की लगभग 6000 मान्यता प्राप्त संस्कृतियों में 5000 संस्कृतियां स्वदेशी हैं जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 10 प्रतिशत है। बहुत से देशों में परंपरागत जाति - प्रथा, भेदभावपूर्ण विधियां, अर्थिकी या पूर्वाग्रह से स्वदेशीजनों का दमन होता है। उनकी विशिष्ट संस्कृतियां लुप्त हो रही हैं और उनके साथ-साथ प्राकृतिक आवास स्थान के रूप में जैव विविधता नष्ट हो रही हैं ताकि औद्योगीकृत जगत के संसाधनों की मांग को पूरा किया जा सके। समस्त विश्व में पाश्चात्य संस्कृति का तेजी से प्रभाव फैलने के कारण पारंपरिक जीवनशैली और भी विध्वंश हो जाती है।

विश्व की 6000 विशिष्ट भाषाओं में से कम से कम आधी भाषाएँ विलुप्त हो रही है क्योंकि अब बच्चों को इनका शिक्षण नहीं किया जाता है। जब अतिम कुछेक वृद्धजन जो अभी भी इस भाषा में बोलते हैं उनकी मृत्यु हो जाएगी तो इसकी जनक - संस्कृति का भी अंत हो जाएगा। उन संस्कृतियों के समाप्त होने के साथ-साथ प्रकृति के बारे में ज्ञान का समृद्ध व विपुल भंडार और एक विशिष्ट पर्यावरण एवं जीवनशैली की गहन समझ भी समाप्त हो जाएगी। अभिरुचि जनक तथ्य यह है कि मानव की सभी भाषाओं में से 60 प्रतिशत भाषायें 12 देशों में प्रयुक्त होती है। इनमें से सात देश 'विशाल विविधता' वाले देश है जहां समस्त विशिष्ट पादप एवं जन्तुओं की आधे से अधिक प्रजातियाँ हैं I बहुत से विशिष्ट प्रजातियों के अनुकूल उदविकास सामर्थ्यकारी परिस्थितियां समान रूप से विविधतापूर्ण मानवीय संस्कृति के विकास में भी सहायक प्रतीत होती हैं।

इस गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है:

1
देशज जगत की अवस्था
2
जैव विविधता संरक्षण के उपाय
3
स्वदेशीजन और वैश्विक जैव विविधता
4
स्वदेशीजनों का सशक्तीकरण

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