नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दीजिए।
घरेलू स्तर पर महामारी के पश्चात् की सामान्य स्थिति ने आयातित आगतों की नवीकृत मांग को प्रेरित किया है। किन्तु विदेशों में, इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है जिसके चलते मांग में कमी आयी है। विदेशी घरेलू-उपभोक्ता (परिवार) अब अनेक वस्तुओं की मांग नहीं कर रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन जिसके चलते उन्हें अपने घरों में रहना पड़ा और वित्तीय प्रोत्साहन जिसने उन्हें खर्च हेतु धन उपलब्ध कराया, अब वह दोनों समाप्त हो गए हैं। इसलिए जब भारत के पण्य निर्यातों में कमी आरंभ हुई है, तब उसी समय में उसके आयात में उछाल आया है।
जैसे जैसे विकसित देश अपरिहार्य प्रतीत हो रही मंदी की ओर बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे विदेशी मांग आगे धीमी होती जाएगी। उस स्थिति में, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) और आगे वर्ष 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद के 4 प्रतिशत की सीमा तक बढ़ सकता है, जो भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा परंपरागत तरीके से "सुरक्षित" समझे जाने वाले स्तर का दोगुना है। भारत को किस प्रकार से प्रतिक्रिया देनी चाहिए?
एक संभावना तो यह है कि सकल घरेलू उत्पाद के कम से कम 4 प्रतिशत तक विदेशी पूँजी आगम को आकर्षित किया जाए। किन्तु क्या यह यथार्थपरक है? विश्व वर्तमान में आसाधारण स्तर की अनिश्चितता का सामना कर रहा है। महामारी के दो वर्षों के बाद हम यूरोप में भू-युद्ध, पिछले चार दशकों में विकसित देशों में सर्वाधिक मुद्रास्फीति, US फेडरल रिजर्व के इतिहास में ब्याज दर उछालों में तीव्रतम गति, यूरोप में ऊर्जा संकट और निरंतर तरीके से कोविड-19 के संकट से जूझ रहे चीन में मंदी के साक्षी हैं।
इस प्रकार के अनिश्चित माहौल में, विदेशी निवेशक, भारत के जैसे उभरते हुए बाजारों की अपेक्षा US सरकारी बांड जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश को वरीयता देते हैं।
नीचे दो कथन दिए गए है :
कथन I: एक अनिश्चित वातावरण में, विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते हुए बाजारों में निवेश करना पसंद करते हैं।
कथन II: लेखक के अनुसार, आगे वर्ष 2022-23 तक चालू खाता घाटा के बढ़ जाने की संभावना है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए: