राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 1975, 1988, 2000 एवं 2005 ने कला शिक्षा पर जोर दिया उसके लक्ष्यों एवं उददेश्यों की परिभाषा करके उन्होने कला शिक्षा में निदर्शन परिवर्तन का आग्रह किया जिसमें निम्न हो:

1
हस्तशिल्प पे काम करके श्रम की गरिमा से सौन्दर्यबोध और मुक्त अभिव्यक्ति का विकास 
2
हस्तशिल्प पे काम करके श्रम की गरिमा से व्यवसायिक रूप से साध्य कौशल का विकास 
3
हस्तशिल्प पे काम करके श्रम की गरिमा से आर्थिक एवं फलप्रद अस्मिता का विकास
4
हस्तशिल्प पे काम करके श्रम की गरिमा से व्यवसायिक समझ एवं नए युग की संभावना का विकास

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