भारत में स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दौर के इतिहास लेखन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1960 के दशक तक मार्क्सवादी इतिहासकारों का शैक्षणिक क्षेत्र पर दबदबा था।
- मुख्य ध्यान यूरोपीय केंद्रित आख्यानों से भारतीय इतिहास को मुक्त करने पर था।
- सबऑर्डिनेट स्टडीज समूह अभिजात्य ऐतिहासिक लेखन के प्रति एक प्रति-कथा के रूप में उभरा।
- 1947 के तुरंत बाद उत्तर-आधुनिक इतिहास लेखन मुख्यधारा में आ गया।
कौन से कथन सही हैं?
1
1, 2 और 3
2
2 और 3
3
1, 2, और 4
4
1 और 3