Comprehension Passage
निर्देश (प्रश्न संख्या 11 से 13 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए।
प्रेमचंद की कहानियों में विषय वैविध्य दिखाई पड़ता है। किसी अन्य कथाकार ने जीवन के इतने व्यापक फलक को अपनी कहानियों में नहीं समेटा जितना प्रेमचंद ने उनकी अधिकांश कहानियों का विषय ग्रामीण जीवन से लिया गया है, किंतु नई कहानियाँ कस्बे की जिंदगी या स्कूल - कॉलेज से जुड़ी हुई हैं। उनकी कहानियों के पात्र हर वर्ग, धर्म, जाति के हैं। कोई हिंदू है तो कोई मुसलमान, कोई किसान है तो कोई विद्यार्थी अपनी कहानियों में उन्होंने विविध समस्याओं को उठाया है, यथा - किसानों के शोषण की समस्या, रूढ़ि एवं अंधविश्वास, संयुक्त परिवार की समस्या, भ्रष्टाचार एवं व्यक्तिगत जीवन की समस्याएँ आदि। प्रेमचंद की प्रारम्भिक कहानियाँ - पंच परमेश्वर, नमक का दरोगा, ईदगाह, प्रेरणा आदि में आदर्श का पुट दिया गया है जबकि परवर्ती कहानियाँ, यथा - पूस की रात और कफन में यथार्थ का पुट है। स्पष्ट है कि वे आदर्शवाद से यथार्थवाद की ओर अग्रसर हुए। प्रेमचंद का कथाशिल्प भी उत्तरोत्तर विकास पथ पर अग्रसर रहा है। प्रारंभिक कहानियों में इतिवृत्तात्मकता अधिक है तथा चरित्र चित्रण की मनोवैज्ञानिकता के स्थान पर व्यक्ति के आचरण का वर्णन अधिक किया गया है। 'पंच परमेश्वर' इसी कोटि की कहानी है, किन्तु 1930 के बाद की कहानियों में कथानक छोटे एवं संश्लिष्ट होते गए तथा कहानी की मूल संवेदना को उभारने वाली दो तीन घटनाओं पर ही बल दिया जाने लगा। कहानियों में चरित्रांकन मनोविश्लेषणात्मक पद्धति पर होने लगा और कहानी को चरम सीमा तक द्वंद्व एवं समस्या के माध्यम से पहुँचाया गया। शतरंज के खिलाड़ी इसी प्रकार की कहानी है।
प्रेमचंद की कहानियों में विषय वैविध्य दिखाई पड़ता है। किसी अन्य कथाकार ने जीवन के इतने व्यापक फलक को अपनी कहानियों में नहीं समेटा जितना प्रेमचंद ने उनकी अधिकांश कहानियों का विषय ग्रामीण जीवन से लिया गया है, किंतु नई कहानियाँ कस्बे की जिंदगी या स्कूल - कॉलेज से जुड़ी हुई हैं। उनकी कहानियों के पात्र हर वर्ग, धर्म, जाति के हैं। कोई हिंदू है तो कोई मुसलमान, कोई किसान है तो कोई विद्यार्थी अपनी कहानियों में उन्होंने विविध समस्याओं को उठाया है, यथा - किसानों के शोषण की समस्या, रूढ़ि एवं अंधविश्वास, संयुक्त परिवार की समस्या, भ्रष्टाचार एवं व्यक्तिगत जीवन की समस्याएँ आदि। प्रेमचंद की प्रारम्भिक कहानियाँ - पंच परमेश्वर, नमक का दरोगा, ईदगाह, प्रेरणा आदि में आदर्श का पुट दिया गया है जबकि परवर्ती कहानियाँ, यथा - पूस की रात और कफन में यथार्थ का पुट है। स्पष्ट है कि वे आदर्शवाद से यथार्थवाद की ओर अग्रसर हुए। प्रेमचंद का कथाशिल्प भी उत्तरोत्तर विकास पथ पर अग्रसर रहा है। प्रारंभिक कहानियों में इतिवृत्तात्मकता अधिक है तथा चरित्र चित्रण की मनोवैज्ञानिकता के स्थान पर व्यक्ति के आचरण का वर्णन अधिक किया गया है। 'पंच परमेश्वर' इसी कोटि की कहानी है, किन्तु 1930 के बाद की कहानियों में कथानक छोटे एवं संश्लिष्ट होते गए तथा कहानी की मूल संवेदना को उभारने वाली दो तीन घटनाओं पर ही बल दिया जाने लगा। कहानियों में चरित्रांकन मनोविश्लेषणात्मक पद्धति पर होने लगा और कहानी को चरम सीमा तक द्वंद्व एवं समस्या के माध्यम से पहुँचाया गया। शतरंज के खिलाड़ी इसी प्रकार की कहानी है।
उपर्युक्त अवतरण किस शैली में लिखा गया है?
1
विवरणात्मक
2
आलोचनात्मक
3
विवेचनात्मक
4
विश्लेषणात्मक