Comprehension Passage

माधवदास ने अपनी संगमरमर की नयी कोठी बनवाई है l उसके सामने बहुत सुहावना बगीचा भी लगवाया है l उनको कला से बहुत प्रेम है l धन की कमी नहीं है और व्यसन छू नहीं गया है l सुन्दर अभिरुचि के आदमी हैं l फूल-पौधे, रकाबियों से हौजों में लगे फव्वारों में उछलता हुआ पानी उन्हें बहुत अच्छा लगता है l समय भी उनके पास काफ़ी है l शाम को जब दिन की गर्मी ढल जाती है और आसमान कई रंग का हो जाता है तब कोठी के बाहर चबूतरे पर तख्त डलवाकर मसनद के सहारे वह गलीचे पर बैठते हैं और प्रकृति की छटा निहारते हैं l इनमें मानो उनके मन को तृप्ति मिलती है l मित्र हुए तो उनसे विनोद-चर्चा करते हैं, नहीं तो पास रखे हुए फर्शी हुक्के की सटक को मुँह में दिए खयाल ही खयाल में संध्या को स्वप्न की भांति गुज़ार देते हैं l 

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर बताइये :

मसनद का प्रयोग किस रूप में होता है?

1
लिहाफ के रूप में 
2
चादर के रूप में 
3
गद्दे के रूप में 
4
तकिये के रूप में 

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