अवतरण को पढ़ कर दिए गए प्रश्नों को पढ़िए । प्रश्नों के उत्तर चार विकल्पों में दिए गए हैं । समुचित उत्तर चुनिए।
स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि शारीरिक दुर्बलता ही हमारे दुख के कम-से-कम एक तृतीयांश का कारण है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास संभव है। शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए खेल अनिवार्य है। खेल और व्यायाम का घनिष्ठ संबंध है। खेल व्यायाम का एक मनोरंजक ढंग है। खेलने से बालक के अंगों का विकास होता है और उसकी अनावश्यक शक्ति बाहर निकल जाती है। अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी समझ जीवन के दो सर्वोत्तम वरदान हैं। इन दोनों की प्राप्ति के लिए जीवन में खिलाड़ी की भावना से खेल खेलना आवश्यक है। खेलने से शरीर को बल, माँस –पेशियों को उभार, भूख की तीव्रता और आलस्यहीनता आदि मिलती है। न खेलने से शरीर दुर्बल, रोग ग्रस्त और कमज़ोर हो जाता है । इन सबका दुष्प्रभाव मन पर पड़ता है। जिससे मनुष्य की सूझ-बूझ समाप्त हो जाती है। मनुष्य निस्तेज, उत्साहहीन और लक्ष्यहीन हो जाता है शरीर और मन से दुर्बल व्यक्ति जीवन के सच्चे सुख और आनन्द को प्राप्त नहीं कर सकता। धन-संपदा, सामाजिक प्रतिष्ठा और ऊँचा पद प्राप्त होने पर भी, बिना अच्छे स्वास्थ्य के मनुष्य दुखी रहता है।