निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
परिवर्तन व विकास वास्तव में प्रकृति का नियम है। यह सिद्धांत पर्यावरण के ऊपर भी लागू होता है। विकास के इसी धारा में एक-कोशकीय जीव से बौद्धिक तौर पर सबसे सक्षम जीव मानव तक का सफ़र तय किया है। इसीलिए मानव धरती को “माँ” की संज्ञा देता है। लेकिन आज का आधुनिक मानव विकास के नाम पर अपनी इस धरती माँ के वजूद से खेल रहा है। शहरों में जमीन क्रंक्रीट के जंगल से आच्छादित हो गयी है, नतीजतन हरे पेड़ रह नहीं गए। फिर सड़कों के काले रंग ने सूर्य के किरणों का अवशोषण बढ़ा दिया है। ऊपर से बारिश के जल का भूगर्भ में जाना भी प्लास्टिक व अन्य कारकों की वजह से बाधित हो गया है। नतीजतन शहर “हीट आइलैंड” बन गए हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण भारत के कई शहरों ने इस साल देखा जब मार्च के महीने से ही “Heat Wave” का जबरदस्त प्रकोप अभी तक जारी है। आलम यह कि देश के कई हिस्सों के तापमान 50 डिग्री से भी ज्यादा पहुँच गया। इस से न सिर्फ आम जीवन-यापन बल्कि गेंहूँ व अन्य फसलों का उत्पादन, लोगों की आजीविका खासकर ठेले-खोमचे वाले लोग, वन्य जीव व पेड़ पौधों तक प्रभावित हुआ है। विकास के अंधी दौड़ के बजाय “सतत विकास” का सिद्धांत ही धरती के स्वास्थ्य के लिए सही रास्ता है। लेकिन इसे किताबों और प्रोफेसर साहब के लेक्चर्स से निकालकर आम जन जीवन से जोड़ना होगा। भारत की पुरानी परंपराएं, जहाँ ऋग्वेद के ऋचाओं से लेकर तमाम पूजा-परिपाटी, पर्यावरण के विभिन्न आयामों को महत्व देता है। हमें आधुनिक विकास के परिपाटी को इस तरह से तय करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को एक माकूल धरती दे सकें। इसी कारण धरती पर आने वाली सौर ऊर्जा को जीव ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया -प्रकाश संश्लेषण- को चरम पर ले जाने की आवश्यकता है। और इसके लिए अनिवार्य है कि पृथ्वी पर अधिकाधिक मात्रा में सघन हरियाली, स्वच्छ हवा और पानी को सुनिश्चित किया जाना है। शहरीकरण, फैक्ट्रीज व वाहनों से निकलती प्रदूषित गैसें और पार्टिकुलेट मैटर पर्यावरण के स्वास्थ को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से धरती को बचाने वाली ओज़ोन परत भी क्षरित हो रही है। कुल मिलाकर सबकुछ इसी रफ्तार से होता रहा तो सदी के अंत तक पृथ्वी पर जीना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हमें अपनी जीवन शैली में भी यह ध्यान रखना होगा कि ब्रम्हांड में केवल एक ही पृथ्वी है, दूसरा नहीं।