Comprehension Passage
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर 16 से 20 प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मार्क्सवाद से साहित्य के समाजशास्त्र का संबंध अत्यंत जटिल रहा है। कुछ मार्क्सवादियों ने तो साहित्य को समाजशास्त्र से यह कहकर बचाने पर बल दिया है कि समाजशास्त्र उस तंत्र की सेवा करता है, जो कला और साहित्य के विकास की संभावना को खत्म करता है। इसलिए ऐसे अनुशासन की पद्धति का साहित्य के विश्लेषण में इस्तेमाल करना घातक होगा। प्रसंगगत टेरी इग्लटन लिखते हैं कि – “मार्क्सवादी आलोचना ‘साहित्य का समाजशास्त्र’ भर नहीं है। वह कृति की कालबद्धता ही नहीं, उसकी कालातीतता की भी व्याख्या करती है। उसकी मौलिकता साहित्य की ऐतिहासिक समझ में नहीं, बल्कि क्रांतिकारी समझ में है।” स्तेल एवं तेन आदि के द्वारा निर्मित व विकसित विधेयवादी समाजशास्त्र की मूल्यनिरपेक्षता एवं कलाकृतियों के सौंदर्यबोधात्मक पहलू को नजरअंदाज कर देने की प्रवृत्ति का खंडन करते हुए जेने उल्फ ने अपनी पुस्तक 'सौंदर्यशास्त्र और कला का समाजशास्त्र' (1983) में मार्क्स एवं तमाम मार्क्सवादी आलोचकों के अवदान को समाजशास्त्रीय अध्ययन की परिधि में ही शुमार किया है। उन्होंने लिखा है - "मैं नहीं मानती कि हमें समाजशास्त्र का उपयोग करते हुए किसी तरह का संकोच करने, क्षमा माँगने या अपराध महसूस करने की जरूरत है। ऐतिहासिक भौतिकवाद समाज के अनुशीलन का सिद्धांत है और मैं उसकी अर्थ में समाजशास्त्र को स्वीकार करती हूँ।" ऐतिहासिक भैतिकवाद और मार्क्सवादी साहित्यालोचन से संबद्ध विविध धारणाओं का कला के समाजशास्त्र के संदर्भ में इस्तेमाल करने का एक हद तक सफल प्रयास करते हुए जेने उल्फ ने प्रकारांतर से एक ऐसे समाजशास्त्रीय सौंदर्यशास्त्र के निर्माण की संभावना पर विचार किया है, जिसके तहत बुर्जुआ सौंदर्यशास्त्र की भाववादी सीमाओं के साथ-साथ समाजशास्त्रीयता के अतिरिक्त आग्रह के चलते पैदा होने वाले सरलीकरणों से बचना भी संभव हो सके। कहना न होगा कि मार्क्स-एंगेल्स के बीज विचारों के मद्देनजर आगे चलकर जार्ज लुकाच, गोल्डमान, रेमंड विलियम्स, लियो लावेंथल आदि के द्वारा मार्क्सवादी आलोचना का जो स्वरुप निर्मित एवं विकसित हुआ, उसमें वर्ग चेतना एवं वर्ग संघर्ष के साथ-साथ साहित्य के सौंदर्यबोधात्मक वैशिष्ट के विवेचन-विश्लेषण की भी पूरी गुंजाइश है।प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?
1
ऐतिहासिक भौतिकवाद
2
मार्क्सवाद और साहित्य का समाजशास्त्र
3
भौतिकवाद और साहित्य
4
सौन्दर्यशास्त्र