Comprehension Passage
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर 1 से 5 प्रश्नों के उत्तर उपयुक्त विकल्पों के द्वारा दीजिए:
आमतौर से हिंदी में गद्य की चर्चा नहीं होती है। कारण यह कि हमारा पाठ्यक्रम काव्यप्रधान है। कविता की परंपरा लगभग हजार साल पुरानी है, जबकि गद्य की परंपरा डेढ़ से दो सौ साल की है। दूसरे शब्दों में, कविता की उम्र ज्यादा है, गद्य की कम। उम्र के अलावा गुणवत्ता की दृष्टि से भी गद्य को प्रायः दोयम दर्जे का माना जाता है। किसी भाषा में यदि बीस लेखकों की सूची बनायी जाए तो उनमें संभवतः पन्द्रह कवि होंगे, पाँच मुश्किल से गद्यकार होंगे। साहित्य की साहित्यिकता की दृष्टि से भी काव्य को विप्र माना जाता है। हालाँकि गद्य की अनेकानेक विधाएँ हैं और लोकप्रियता की दृष्टि से भी गद्य पर काम करना आसान माना जाता है पर गद्य शैली के बारे में यदि हिंदी में किताबें खोजी जाएँ, तो उनकी संख्या न के बराबर होगी। अंग्रेजी में ‘प्रोज़ ऑफ लाइफ’ या ‘पोएटिक्स ऑफ प्रोज़’ जैसी पुस्तकें मिलती हैं, पर हिंदी में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि कोई गद्य के ‘काव्यशास्त्र’ पर विचार कर सकता है। हिंदी में किसी कहानीकार या उपन्यासकार के सौन्दर्यशास्त्र पर जो किताबें उपलब्ध हैं, उनमें उस लेखक के गद्य के सौन्दर्यशास्त्र की कहीं कोई चर्चा नहीं मिलती। कहना न होगा कि गद्य में गठन तथा कसावट के द्वारा वर्णन और अनुभव की तरलता के जिस सही अनुपात का ध्यान रखा जाता है, कविता उसे छंदों की मदद से साधती है पर गद्य में छंद नहीं होता। वहाँ एक आन्तरिक लय होती है, जिसके लिए उसमें काईनेटिक सिद्धांत अपनाया जाता है। इसके तहत वहाँ साँस के अनुसार छोटे-बड़े वाक्यों की रचना की जाती है। अर्थात् जिस बात को कहने में जितनी दूर तक साँस रहे, वाक्य उतना ही बड़ा होना चाहिए।‘काव्यशास्त्र’ शब्द में कौन-सा समास है?
1
तत्पुरुष समास
2
द्विगु समास
3
बहुब्रीहि समास
4
अव्ययीभाव समास