Comprehension Passage

दिए गए गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अस्पृश्यों की दयनीय स्थिति से दु:खी हों। यह चिल्ला कर अपना जी हल्का करते फिरते हैं कि 'हमें अस्पृश्यों के लिए कुछ करना चाहिए।' लेकिन इस समस्या को जो लोग हल करना चाहते हैं, उनमें से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो यह कहता हो कि 'हमें स्पृश्य हिंदुओं को बदलने के लिए भी कुछ करना चाहिए।' यह धारणा बनी हुई है कि अगर किसी का सुधार होना है तो वह अस्पृश्यों का ही होना है। अगर कुछ किया जाना है तो वह अस्पृश्यों के प्रति किया जाना है और अगर अस्पृश्यों को सुधार दिया जाए, तब अस्पृ‍श्यता की भावना मिट जाएगी। सवर्णों के बारे में कुछ भी नहीं किया जाना है। उनकी भावनाएँ, आचार-विचार और आदर्श उच्च हैं। वे पूर्ण हैं, उनमें कहीं भी कोई खोट नहीं है। क्या यह धारणा उचित है? यह धारणा उचित हो या अनुचित, लेकिन हिंदू इसमें कोई परिवर्तन नहीं चाहते? उन्हें इस धारणा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे इस बात से आश्वस्त हैं कि वे अस्पृश्यों की समस्या के लिए बिल्कुल भी उत्तरदायी नहीं हैं। अस्पृश्यता पर लज्जित होने के बजाए, हिंदू उसे हमेशा उचित ठहराने की कोशिश करते हैं। इसके समर्थन में उनका यह कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में गुलाम-प्रथा कभी नहीं रही और यह कि अस्पृश्यता किसी भी दशा में उतनी बुरी नहीं है, जितनी कि गुलाम-प्रथा है। ऐसा ही तर्क स्व. लाला लाजपतराय जैसे महान व्यक्ति ने 'अनहैप्पी इंडिया' नामक अपनी पुस्तक में दिया है। इस कथन का खंडन करने के लिए समय का अपव्यय करने की आवश्यकता नहीं थी, अगर बाकी दुनिया को, जिसने गुलाम-प्रथा से बुरी कोई प्रथा देखी ही नहीं, यह विश्वास नहीं होता कि अस्पृश्यता गुलाम-प्रथा से बुरी हो ही नहीं सकती।

उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा? 

1
अस्पृश्यता
2
जातिप्रथा
3
हिंदुधर्म और अस्पृश्यता
4
अस्पृश्य भारत की स्थिति

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