निर्देश: दिए गये गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए l
संसार के मानव समुदाय में वही व्यक्ति स्थान और सम्मान पा सकता है, वही जीवित कहा जा सकता है जिसके हृदय और मस्तिष्क ने समुचित विकास पाया हो और जो अपने व्यक्तित्व द्वारा मनुष्य समाज से रागात्मक के अतिरिक्त बौद्धिक सम्बंध स्थापित कर सकने में समर्थ हो l एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के विकास की सबको आवश्यकता है, करण, बिना इसके न मनुष्य अपनी इच्छा शक्ति और संकल्प को अपना कह सकता है और न अपनी किसी कार्य को न्याय-अन्याय की तुला पर तोल ही सकता है l
नारी का मानसिक विकास पुरुषों के मानसिक विकास से भिन्न परंतु अधिक द्रतु, स्वभाव अधिक कोमल और प्रेम-घृणादि भाव अधिक तीव्र तथा स्थायी होते हैं l इन्हीं विशेषताओं के अनुसार उसका व्यक्तित्व विकास पाकर समाज के उन अभावों की पूर्ति करता रहता है जिनकी पूर्ति पुरुष-स्वभाव द्वारा सम्भव नहीं l दोनों के व्यक्तित्व, अपनी पूर्णता में समाज के एक ऐसे रिक्तस्थान को भर देते हैं जिससे विभिन्न सामाजिक सम्बंधो में सामंजस्य उत्पन्न होकर उन्हें पूर्ण कर देता हैं l