निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
बोलियों के मरने से भाषा ही खत्म नहीं होती, बचपन भी मरता है, संस्कृति मरती है क्योंकि बोलियाँ संस्कृति की संवाहक होती हैं। इसलिए संस्कृति को जीवित रखने के लिए बोलियों को जीवित रखना होगा। लोकगीत शताब्दियों से गए जा रहें हैं और वो जन मानस मे रच बस गए हैं।
बोलियों को जीवित रखने के लिए आपसी संवाद, व्याख्यान और परिचर्चाएं जरूरी हैं। बोलियां नदियों की तरह होती हैं। उनके साथ संस्कार भी बहते चले आते हैं। इन्हें जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयास होते रहना चाहिए। जैसे बोली विशेष से संबन्धित साहित्य संगोष्ठियों का नियमित आयोजन जिससे परचर प्रसार होता रहे और वर्तमान युवापीढ़ी भी जुड़ सके। बोलियों के साहित्य का संग्रह भी महत्वपूर्ण है। इसी दिशा मे भोज शोध संस्थान धार बोलियों के संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास कर रहा है जो अत्यंत जरूरी है। यह प्रयास स्तुत्य है। पाठकों के लिए पुस्तक को सरल बनाने के लिए रचनाओं के साथ संदर्भ और शब्दार्थ दिए जाएँ। चार्ट और तालिका बनाई जाएँ। उसे खंडों में विभाजित किया जाए। हिन्दी की पाँच उपभाषाएँ, 17 बोलियाँ और 10 उपबोलियाँ हैं।