'करते अभिषेक पयोद है, बलिहारी इस वेष की।
हे मातृभूमि ! तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की।।'
प्रस्तुत पंक्तियों में छंद हैः
1
दोहा
2
रोला
3
उल्लाला
4
वंशस्थ
'करते अभिषेक पयोद है, बलिहारी इस वेष की।
हे मातृभूमि ! तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की।।'
प्रस्तुत पंक्तियों में छंद हैः