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यात्रा करना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है और यात्रा शिक्षा का एक साधन है। शिक्षा के द्वारा मनुष्य का चरित्र निर्माण होता है। शिक्षा वही अच्छी होती है जिसे पढ़कर मनुष्य स्थिति अनुसार सामंजस्य स्थापित करे। हम इस योग्यता को पुस्तक से प्राप्त नहीं कर सकते जबकि यात्रा से प्राप्त कर सकते हैं। यात्रा के समय जिस प्रकार हम अपनी सभी चीजों को संभालते हैं, जैसे- टिकट एक आवश्यक चीजें है। साथ ही हम समय का खास ख्याल रखते हैं तभी ठीक समय पर गाड़ी पकड़ पाते हैं। इस यात्रा में हमें अपने सभी काम स्वयं करने पड़ते हैं। यात्रा हमें अनेक समस्याओं का सामना करना सिखाती है। अलग-अलग स्थानों से होकर हमारी गाड़ीं गुजरती है जिसकी वजह से हमें बहुत-सी नई चीजें देखने को मिलती हैं। अलग-अलग जगह के लोगों से बातचीत करने से नई चीजें सीखने को भी मिलती हैं। यदि कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं जाता है तो उसका दृष्टिकोण बहुत संकरा होता है। यूरोप में यात्रा के बिना शिक्षा अधूरी समझी जाती है।
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