निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए।
माना जाता है कि इंद्र किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं, बल्कि यह एक पद का नाम है और दूसरा एक विशेष प्रकार के बादल का भी नाम है। इंद्र एक काल (समय पीरियड) का नाम भी है। मनवंतर में अलग इंद्र, सप्तर्षि, अंशावतार, मनु होते हैं। अर्जुन एक इन्द्र के दी पुत्र थे। इंद्र को सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, देवेश, शचीपति, वासव, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज भी कहा जाता है। इंद्र के कारण ही इंद्र धनुष, इंद्रजाल, इंद्रियां, इंदिरा जैसे शब्दों की उत्पत्ति हुई है। इंद्र को देवताओं का अधिपति माना गया है। इंद्र को उनके छल के कारण अधिक जाना जाता है। वैदिक समाज जहां देवताओं की स्तुति करता था, वहीं वह प्राकृतिक शक्तियों की भी स्तुति करता था और वह मानता था कि प्रकृति के हर तत्व पर एक देवता का शासन होता है। उसी तरह वर्षा या बादलों के देवता इंद्र हैं तो जल (समुद्र, नदी आदि) के देवता वरुण हैं। ऋग्वेद के तीसरे मण्डल के वर्णनानुसार इन्द्र ने विपाशा (व्यास) तथा शतद्रु नदियों के अथाह जल को सुखा दिया जिससे भरतों की सेना आसानी से इन नदियों को पार कर गई। दशराज्य युद्ध में इंद्र ने भरतों का साथ दिया था। सफेद हाथी पर सवार इंद्र का अस्त्र वज्र है और वह अपार शक्तिशाली देव है। ऐसे माना जाता है कि इंद्र की सभा में गंधर्व संगीत से और अप्सराएं नृत्य कर देवताओं का मनोरंजन करते हैं।