निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करें।
महाराणा प्रताप सिंह जंगल-जंगल मारे-मारे फिरते थे, अपनी स्त्री को भूख से तड़पते देखते थे, परन्तु उन्होंने उन लोगों की बात नहीं मानी, जिन्होंने उन्हें अधीनतापूर्वक जीते रहने की सम्मति दी, क्योंकि वे जानते थे कि अपनी मर्यादा की चिंता जितनी अपने को हो सकती है, उतनी दूसरे को नहीं। एक बार एक रोमन राजनीतिक बलवाइयों के हाथ में पड़ गया। बलवाइयों ने उससे व्यंग्यपूर्वक पूछा, "अब तेरा किला कहाँ है” उसने हृदय पर हाथ रखकर उत्तर दिया, "यहाँ” ज्ञान के जिज्ञासुओं के लिए यही बड़ा भारी गढ़ है। मैं निश्चयपूर्वक कहता हूँ कि जो युवा पुरूष सब बातों में दूसरों का सहारा चाहते हैं, जो सदा एक नया अगुआ दूँढ़ा करते हैं और उनके अनुयायी बना करते हैं, वे आत्म-संस्कार के कार्य में उन्नति नहीं कर सकते। उन्हें स्वयंं करना अपनी सम्मति आप स्थिर करना, दूसरों की उचित बातों का मूल्य समझते हुये भी उनका अंधा भक्त न होना सीखना चाहिए। तुलसीदास जी को लोक में जो इतनी सर्वप्रियता और कीर्ति प्राप्त हुई, उनका दीर्घ जीवन जो इतना महत्वमय और शांतिमय रहा, सब इसी मानसिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के कारण। वहीं उनके समकालीन केशवदास को देखिए, जो जीवनभर विलासी राजाओं के हाथ कठपुतली बने रहे, जिन्होंने आत्म- स्वतंत्रता की ओर कम ध्यान दिया और अंत में आप अपनी बुरी गति की। जिस मनुष्य की बुद्धि और चतुराई उसके दृढ़ हृदय के आश्रय पर स्थिर रहती है, वह जीवन और कर्म-क्षेत्र में स्वयं भी श्रेष्ठ और उत्तम रहता है और दूसरों को भी श्रेष्ठ और उत्तम बनाता है। प्रसिद्ध उपन्यासकार स्कॉट एक बार ऋण के बोझ से बिलकुल दब गये। मित्रों ने उनकी सहायता करनी चाही पर उन्होंने यह बात स्वीकार नहीं की और स्वयं अपनी प्रतिभा का सहारा लेकर अनेक उपन्यास थोड़े समय के बीच लिखकर लाखों रूपये का ऋण अपने सिर से उतार दिया।