"माखे लखन कुटिल भयीं भौंहें।, रद-पट फरकत नयन रिसौहैं।।
कहि न सकत रघुबीर डर, लगे वचन जनु बान।, नाइ राम-पद-कमल-जुग, बोले गिरा प्रमान।।” में कौन सा रस है?
1
रौद्र रस
2
भयानक रस
3
श्रृंगार रस
4
करूण रस
5
वात्सल्य रस