वियोग श्रृंगार रस किस पंक्ति में है –
1
अरे बता दो मुझे कहाँ प्रवासी है मेरा
इसी बावले से मिलने को डाल रही है हूँ मैँ फेरा
इसी बावले से मिलने को डाल रही है हूँ मैँ फेरा
2
पद पाताल सीस अजधामा, अपर लोक अंग-अंग विश्रामा
करही अनीति जाई न बरनि, सीतही देखी विप्र धेनु सुर धरनी।।
करही अनीति जाई न बरनि, सीतही देखी विप्र धेनु सुर धरनी।।
3
अखिल भुवन चर अचर सब, हरिमुख में लखि मात।
चकित भई गदगद वचन, विकसित दृग पुलकात।।
चकित भई गदगद वचन, विकसित दृग पुलकात।।
4
सीता गई तुम भी चले मै भी न जिऊंगा यहाँ
सुग्रीव बोले साथ में सब जाएँगे वानर वहाँ।
सुग्रीव बोले साथ में सब जाएँगे वानर वहाँ।
5
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान, मृतक में भी डाल देगी जान
धूल-धुसर तुम्हारे ये गात…
धूल-धुसर तुम्हारे ये गात…