शांत रस किस पंक्ति में है?
1
जेहि दिसि बैठे नारद फूली।
सो दिसि तेहि न बिलोकी भूली॥
सो दिसि तेहि न बिलोकी भूली॥
2
प्रतिभट कटक कटीले केते काटि काटि,
कालिका सी किलकि कलेऊ देति काल कों।
कालिका सी किलकि कलेऊ देति काल कों।
3
अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥
4
गीध जांघ को खोदि खोदि के मांस उखारत।
स्वान आंगुरिन काटि काटि कै खात बिदारत।।
स्वान आंगुरिन काटि काटि कै खात बिदारत।।
5
राम राम कही राम कही राम राम कही राम,
तनु परिहरि रघुवर बिरह राउ गयऊ सुरधाम।
तनु परिहरि रघुवर बिरह राउ गयऊ सुरधाम।