निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
किसी जमाने में अंगदेश में यशकेतु नाम का एक राजा था। उसका दीर्घदर्शी नाम का एक चतुर दीवान था। राजा बड़ा विलासी था। राज का सारा भार वह दीवान पर डालकर भोग में पड़ गया। दीवान को बहुत दु:ख हुआ। उसने देखा राजा के साथ हर जगह उसकी भी निंदा होती है। इसलिए वह तीरथ का बहाना करके चल पड़ा। चलते-चलते रास्ते में उसे एक शिव मंदिर मिला। उसी समय नीछिदत्त नाम का एक सौदागर वहाँ आया और दीवान के पूछने पर उसे बताया कि वह स्वर्णद्वीप में व्यापार करने जा रहा है। दीवान भी उसके साथ हो लिया। दोनों जहाज पर चढ़कर स्वर्णद्वीप पहुंचे और वहाँ व्यापार करके धन कमाकर लौटे। रास्ते में समुद्र में दीवान को एक कल्पवृक्ष दिखाई दिया। उसकी मोटी-मोटी शाखाओं पर रत्नों से जुड़ा एक पलंग बिछा था। उस पर एक रूपवती कन्या वीणा बजा रही थी। थोड़ी देर में वह गायब हो गई। पेड़ भी नहीं रहा। यह देखकर दीवान चकित रह गया।