निर्देश: नीचे दिए गये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा गद्यांश में वर्णित तथ्यों के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए।
बाल श्रम ने भारतमाता के दैदीप्यमान मस्तक को मलिनतापूर्ण बना दिया है। उद्योगों और विभिन्न कल-कारखानों में हाड़तोड़ परिश्रम करते, मासूम और सबके प्रिय बच्चों को देख मानवता रो पड़ती है। भट्टियों पर काम करते हुए मालिकों के लिए अपने शरीर का होम करने वाले मासूम आँख, नाक एवं फेफड़ों की गम्भीर बिमारियों के शिकार हो रहे हैं। इनकी नियत ही ऐसी है कि मनुष्य जीवन के चक्र का अहम भाग जवानी इनके लिए नहीं बना है। ये तो सीधे ही वृद्धावस्था को प्राप्त करते है। कथित मालिकों की झिड़कियाँ और गाहे-बगाहे मार झेलते इन बालक-बालिकाओं का जीवन देखकर प्रतीत होता है कि सृष्टा ने अत्यधिक क्रूरता से इनका भाग्य रचा है। नियोक्ताओं के लिए बाल श्रम का उपयोग निरापद है। इसके माध्यम से वे अनुचित लाभ उठाकर अपना पथ कंटकविहीन कर लेते है। बाल श्रम रुपी असुर के बंधन में जकड़ी बालिकाओं और किशोरियों की स्थिति और भी भयानक है। गुनहगारो के चार-चार मस्तिष्क ऐसे गुनाह में काम करने के लिए दौड़ते रहते हैं। माता-पिता की दारिद्र्य-मुक्ति हेतु भागीरथी प्रयास करती बालिकाएँ स्वयं एक सर्वभोग्या जलधारा के रूप में प्रवाहमान हैं। जिन्हें जब चाहे ठेकेदार नियोक्ता पी डालते है और अभिभावक विवशतावश चूँ तक नहीं कर पाते। यौनाचार का जो घिनौना चेहरा आज सम्पूर्ण समाज में दिखाई दे रहा है उसके पीछे बाल श्रम की अभिवृद्धि भी प्रमुख रूप से उत्तरदायी है। सिंगापूर, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, नेपाल जैसे देशों में पर्यटन के बहाने मौजमस्ती करने आए लोग दस-बारह वर्ष वाली लड़कियों की माँग करते है ताकि वे एड्स से बच रहें। दलालों के लिए यह सौदा फायदे मंद हो सकते है। वे बाल श्रम में लगी लडकियों और उनके मजबूर माता-पिता को अपना शिकार बनाते है और देह व्यापार के गहरे गर्त में धकेल देते हैं। और यह ढीठ पन जारी रहता है।