दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
तमिल भाषा के कवियों में सुब्रह्मण्यम 'भारती' का स्थान बहुत ऊँचा है। सुब्रह्मण्यम जी बचपन से ही कविताएँ करने लगे थे। ग्यारह वर्ष की आयु तक होते-होते वे अच्छी कविताएँ करने लगे थे। उनकी कविताओं से प्रभावित होकर एट्टयपुरम् के राजा ने बालकवि सुब्रह्मण्यम को 'भारती' की उपाधि से विभूषित किया। उस समय वे केवल ग्यारह वर्ष के थे। भारती ने अपने युग की आवश्यकताओं और उमंगों को अपनी संजीवनी वाणी द्वारा घर-घर में पहुँचाया। पराधीनता के गहरे तिमिर में पड़े जनसाधारण को प्रगति के पथ पर ला खड़ा किया। उनके प्रत्येक शब्द से देशप्रेम, भाषाप्रेम, संस्कृति प्रेम और देश सेवा की भावना परिलक्षित होती है। नारी स्वतंत्रता के वे विशेष समर्थक थे और इसकी आवाज़ भी उन्होंने अपनी कविताओं द्वारा उठाई। अपनी उमंगभरी वाणी से गुलाम भारत के जन-जन का पथ प्रदर्शन किया। वाणी के वरदपुत्र महाकवि 'भारती' पर न केवल तमिल भाषी, अपितु समूचे भारतवासी गर्व करते हैं।