श्री मोहन श्रीवास्तव भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पदाधिकारी हैं। उन्होंने अपनी तैनाती के समय ही कहा था - 'जनपद से भ्रष्टाचार को मिटाकर ही दम लूँगा।' बेचारे! कल ही रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ रे गए। इसी को कहते हैं-

1
अपने घर का जोगिया आन गाँव का सिद्ध
2
आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास
3
अन्धा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर अपने को दे
4
रोपे पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय

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