निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान पूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर उपयुक्त विकल्पों द्वारा दीजिये-
आचार्य बसु ने सोचा कि अगर जड़ पदार्थ से ही जीवन का प्रादुर्भाव हुआ है और जीव तत्व या चेतन का बीज किसी अन्य नक्षत्र से नही आया तो संभव है कि जिसे हम जड़ कहते हैं वह नितांत जड़ नहीं है, चेतन गर्भा है। इसका पता बाहर से प्रदान की गई उत्तेजनाओं के प्रति जड़ पदार्थ की प्रतिक्रियाओं का परीक्षण करके ही लगाया जा सकता था।
बिजली के करेंट के जड़ पदार्थ भी प्रत्युत्तर देते हैं यानी वे उसकी गति का आघात महसूस करते हैं, यह तो देख ही चुके थे। अब उन्होंने देखा कि बाहर की उत्तेजना की मात्रा यदि अत्यधिक हो तो जड़ पदार्थ भी थकान का अनुभव करते हैं और विश्राम के बाद पुनः अपनी पूर्वावस्था में आ जाते हैं। उन्होंने परीक्षण करके यह भी देखा कि तीव्र उत्तेजक द्रव्यों से जड़ पदार्थो में भी तीव्र प्रतिक्रिया होती है और उन पर जहरीले द्रव्यों का प्रभाव वैसा ही होता है, जैसा चेतन प्राणियों पर। अपने परीक्षणों से उन्हें यह विश्वास हो गया कि जड़ और चेतन की प्रतिक्रियाएँ बहुत कुछ समान होती हैं, तब उन्होंने जीव जगत की ओर दृष्टि घुमाई।