निर्देशः गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पो में से सही विकल्प चुने।
जापानियों के बाद चाय पीने वालों की संख्या तिब्बतियों में अधिक पाई जाती है। भारत में आने पर कप-प्लेट में उड़ेल कर चाय पीना भले ही आज तिब्बती सीख गया है, लेकिन इनका पारंपरिक ढंग अलग विशेषता लिए हुए है। तिब्बती दिनभर और खाने के साथ कई प्याले चाय पीते हैं। चाय में मक्खन व नमक डालते हैं और यह खूब गाढ़ी होती है। उसमें सत्तू भी घोला गया होता है। भारत में शरण लेने से पूर्व, तिब्बत में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सब अपना-अपना चाय का प्याला साथ लिए घूमते थे। वह उनके अपने चोगे की उलझन में रखा रहता था। जिस किसी तिब्बती के घर पर, चाहे किसी भी समय अतिथि पहुंचता था, चाय का समाचार आ पहुँचता था। अपनी जेब से अतिथि लकड़ी का प्याला निकालता था तथा उसमें चाय डाली जाती थी। चाय पीकर जीभ से चाट पोछकर प्याला फिर अपने निर्दिष्ट स्थान पर रख लेता था। सन् 1950 तक भारत में चाय का प्रचलन था, परंतु इतना नहीं जितना कि आज है। आज तो बात-बात पर चाय चाय पीने पर कहावत तक बन गई है कि चाय पीने और झूठ बोलने का कोई समय नहीं होता। सन् 50 से पहले तिब्बत के बाद चाय पीने पिलाने में इंग्लैंड का नंबर था। वहाँ सब बातें बकाया और किसी ना किसी उद्देश्य से की जाती हैं। इंग्लैंड में चाय निश्चित समय पर पी जाती है।