निर्देश - निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर, दिए गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए।
साहित्य का आधार जीवन है, इसी नींव पर साहित्य की दीवार खड़ी होती है। उसकी अटारियाँ, मीनार और गुंबद बनते हैं। लेकिन बुनियाद मिट्टी के नीचे दबी पड़ी है। जीवन, परमात्मा की सृष्टि है, इसलिए सुबोध है, सुगम है और मर्यादाओं से परिमित है। मनुष्य अपने कार्यों के लिए परमात्मा के सामने जवाबदेह है या नहीं, हमें नहीं मालूम लेकिन साहित्य तो मनुष्य के सामने जवाबदेह है। इसके लिए कानून है, जिनसे वह इधर-उधर नहीं जा सकता। मनुष्य जीवन पर्यंत आनंद की खोज में लगा रहता है। किसी को वह रत्न द्रव्य में मिलता है तो किसी को ऐश्वर्य में। लेकिन साहित्य का आनंद, इस आनंद से ऊँचा है। उसका आधार सुंदर और सत्य है। वास्तव में सच्चा आनंद सुंदर और सत्य से मिलता है, उसी आनंद को दर्शाना, वही आनंद उत्पन्न करना, साहित्य का उद्देश्य है।