Comprehension Passage
नागरिक के कर्तव्य और अधिकारों की समष्टि को नागरिकता कहा जाता है। नागरिकता ऐसी विशेषता है जिसके अभाव में मनुष्य न तो समाज का आवश्यक अंग बन पाता है और न राज्य का। इसके बिना मनुष्य का जीवन एक प्रकार से या तो पशुवत हो जाता है या महान विरागी संन्यासी के समान जिसका सांसारिकता में कोई संबंध नहीं होता। अतः नागरिकता हर मनुष्य को नागरिक बनाने के लिए आवश्यक है। सदाचार का अर्थ है - सत् + आचार = सात्विक व्यवहार। किंतु साधारण अर्थ में इसका प्रयोग उन सभी व्यवहारों और कार्यों के लिए होता है जो समाज द्वारा ग्राह्य हों और अच्छे माने जाते हैं। समाज मनुष्य की दैनिक और सामाजिक क्रियाओं को नियंत्रित करता रहता है। इसकी आवश्यकता होती है समाज को व्यवस्थित तथा मर्यादित रखने के लिए। झूठ न बोलना, चोरी न करना, किसी को अनावश्यक ढंग से न सताना, अनुचित रीति से कामाचार न करना आदि सदाचार माने जाते हैं। इन सब कार्यों का त्याग इसलिए आवश्यक होता है कि इनसे समाज में अव्यवस्था उत्पन्न होती है तथा समाज का ढांचा लड़खड़ा जाता है। समाज उन्हीं गुणों का आदर-सम्मान करता है जो सामाजिक विधियों को दृढ़ बनाने में तथा बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय कार्यों में सहायक होते हैं।
'कर्त्तव्य और अधिकारों की समष्टि' - इस वाक्य में 'समष्टि' का क्या अर्थ है?
1
वृद्धि
2
सामंजस्य
3
पुष्टि
4
प्रतिस्पर्धा