Comprehension Passage

एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश केआधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पो में से सही विकल्प चुने।

किसी भी राष्ट्र की राष्ट्रभाषा वह होती है, जिसे उसमें रहने वालेअधिकांश नागरिक बोलते, समझतेऔर व्यवहार में लाते हैं। इसके साथ-साथ उस देश की अपनी राष्ट्रभाषा का होना भी अत्यंत आवश्यक होता है। भारत में हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे लेह-लद्दाख से लक्षदीप और अरुणाचल प्रदेश से जैसलमेर तक सभी लोग बोलते हैं। इसलिए हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है।

हिंदी को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने में स्वतंत्रता सेनानियों नेअहम्भूमिका निभाई है। वस्तुतः हिंदी द्वारा ही स्वतंत्रता का संघर्ष लड़ा गया। इसके माध्यम से ही सभी नेता और क्रांतिकारी विचारों का आदान-प्रदान करते थे। हिंदी के लिए गौरव का विषय यह रहा कि इसे राष्ट्रभाषा का स्थान अहिंदीभाषियों ने दिलाया। महात्मा गाँधी, सुभाषचंद्र बोस, लोकमान्य तिलक आदि अहिंदीभाषी थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा का ही प्रयोग किया। सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा दिलाने के लिए जिन महापुरुषों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनमें स्वामी विवेकानंद और स्वामी दयानंद प्रमुख थे। दोनों ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करके जिस भाषा द्वारा भारत को नया आध्यात्मिक चिंतन दिया वह हिंदी ही थी। महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा था- 'अंग्रेज़ी कभी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकती।

जो स्थान हिंदी को प्राप्त है, वह किसी दूसरी भाषा को नहीं मिल सकता।' पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 16 मई सन् 1931 को सेठ गोविंददास को लिखा था- हिंदी ने अब पूर्णतः राष्ट्रभाषा की भूमिका ले ली है। नेता जी सुभाषचंद्र बोस ने 20 सितंबर 1928 को कहा था, 'यदि हमने तन, मन और धन से प्रयत्न किया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत स्वाधीन होगा और उसकी राष्ट्रभाषा हिंदी होगी।'

किसने कहा “यदि हमने तन, मन और धन से प्रयत्न किया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत स्वाधीन होगा और उसकी राष्ट्रभाषा हिंदी होगी”?

1
स्वामी विवेकानंद 
2
सुभाषचंद्र बोस 
3
महात्मा गाँधी
4
जवाहरलाल नेहरू

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