समाज में अगणित समूह होते हैं। इनमे संरचना की दृष्टि से तीन समूह होते है। इन समूहों को एथनिक समूह कहते हैं इन एथनिक समूहों की अपनी एक संस्कृति होती है, एक सामान्य भाषा होती है, खान-पान होता है और तिथि त्यौहार होते हैं। इस तरह की बहुत उप-संस्कृतियाँ जब तक देश के क्षेत्र में मिल जाती है तब वे एक वृहद संस्कृति का निर्माण करती हैं। दूसरें शब्दों में, समाज की संस्कृति अपने आकार-प्रकार में वृहद होती है जिसमें अगणित उप-संस्कृतियाँ होती है। उदाहरण के लिये जब हम भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हैं तो इससे हमारा तात्पर्य यह है कि यह संस्कृति वृहद है जिसमें क संस्कृतियाँ पा जाती है। हमारे देश में अनेकानेक उप-संस्कृतियां है। एक ओर इस देश में गुजराती, पंजाबी यानी भांगड़ा और डांडिया संस्कृति है वही बंगला संस्कृति भी है। उप-संस्कृतियों में विभिन्नता होते हुए भी कुछ ऐसे मूलभूत तत्व है जो इन संस्कृतियों को जोड़कर भारतीय संस्कृति बनाते हैं। हमारे संविधान ने भी इन उप-संस्कृतियों के विकास को पूरी स्वतंत्रता दी है। को भी एक संस्कृति दूसरी संस्कृति के क्षेत्र में दखल नहीं देती। संविधान जहाँ प्रजातंत्र, समानता, सामाजिक न्याय आदि को राष्ट्रीय मुहावरा बनाकर चलता है, वहीं वह विभिन्न उप-संस्कृतियों के विकास के भी पूरे अवसर देता है। ये सब तत्व किसी भी समाज की वृहद संस्कृति को बनाते हैं।
उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक क्या है?