निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लीखिए।
परिश्रम का वही कमाल हैं। इतिहास में यह कमाल बार बार भिन्न भिन्न रूपों में देखा हैं। चन्द्रगुप्त हो या चाणक्य; सिकंदर हो या नेपोलियन; डिजरायली हो या लिंकन; सतलिज हो या खुशचेन; शंकराचार्य हो या खण्डन मिश्र; नेहरू हो या लालबहादुर शास्त्री सभी का जीवन परिश्रम और अध्यवसाय की रोमांचक कथा हैं। तालियों की गड़गड़ाहट के बिच वे संकुचित होकर बैठ गए। पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। एकांत जंगल में, झाड़ियो और पेड़ों के सामने वे बोलने कर अभ्यास करते रहे। पुरे एक वर्ष बाद जब ये फिर से ब्रिटिश संसद में बोलने खड़े हुए तो उनके धरा-प्रवाह भाषण से सांसदों की साँस रुक गई। वर्षो से उन्होंने ऐसा ओजस्वी और प्रभावपूर्ण भाषण नहीं सुना था। वह चमत्कार परिश्रम का ही परिणाम था।
कहते हैं महान कार-निर्माता उद्योगपति ‘फोर्ड' एक साधारण टेक्नीशियन ये, खुशचेन खान मजदूर थे, टाटा, बिरला, मोदी आदि हमारे भारतीय उद्योगपति भी आरंभ में सामान्य-साधारण थे, किंतु निरंतर अटूट परिश्रम ने उन्हें सफलता और सम्पनता के आकाश पर चढ़ दिया। कहने का तात्पर्य यह हैं की जहाँ-जहाँ, जिस जिस क्षेत्र में भी आप सफलता और उत्कर्ष के चमत्कार पाएँगे, उनके पीछे अट्ट परिश्रम और लगन की ही कहानी होगी। विद्याथियों के लिए परिश्रम का विशेष महत्त्व हैं। विद्यार्थी कल साधना कल हैं। यही वह समय हैं जब विद्यार्थी को केवल अपने अध्यनन-मनन और शारीरिक स्वास्थ बनाने के अतिरिक्त और कुछ भी करना नहीं होता। उसका एकमात्र ध्यान अपने शारीरिक-मानसिक विकास को समृद्ध करने की ओर रहता हैं। खाने-पिने, पहनने-ओढ़ने अथवा पढाई-लिखाई के खर्चे आदि की उन्हें कोई चिंता नहीं होती। ऐसी स्थिति में भी यदि वे परिश्रम से जी चुराए तो उनका दुर्भाग्य हैं; क्योकि कहा गया हैं-
सुखार्थिनो कुतो विद्या, विद्यार्थिनो कुतो सुखम'। अर्थात सुख चाहने वाले के लिए विद्या कहाँ और विद्या की इच्छा रखने वाले को सुख कहाँ? परिश्रमी व्यक्ति को अपनी दृष्टि केवल अपने उदेश्य बिंदु पर गड़ाए आगे बढ़ना चाहिए। परिश्रम एक शक्ति हैं। जिसके भी यह शक्ति प्राप्त कर ली सफलता ने उसके गले में जयमाल डाल दी। परिश्रम के बल पर ही व्यक्ति असंभव की संभव कर दिखता हैं। परिश्रम से ही उसके कोयले से हीरे का निर्माण किया, परिश्रम से ही उसने प्रकृति पर अपना अधिकार दिया।
परिश्रम जीवन की मूल शक्ति, उन्नति और सफलता का रहस्य हैं।