अपनी टांग उघारिये आपहि मरिए लाज लोकोक्ति का भावार्थ:-
1
स्वार्थी और मजबूर व्यक्ति अनचाहा कार्य भी करता है।
2
हममें ही कमजोरी हो तो बताने वालों का क्या दोष
3
अपना दोष न देखकर दूसरों का दोष देखना
4
अपने घर की बात दूसरों से कहने पर बदनामी होती है।