निर्देश: इस गद्य को ध्यान से पढ़े और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दें:
कोविड-19 संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को इतनी गहरी चोट दी है कि हालात से उबरने में दशकों लग जायेंगे। विचलित करने वाली खबर यह है कि महामारी के दुष्प्रभावों के चलते अगले दशक के अंत तक एक अरब लोग गरीबी की जद में होंगे। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी एनडीपी का नया अध्ययन बताता है कि वर्ष 2030 तक और बीस करोड़ सत्तर लाख लोग घोर गरीबी की दलदल में फंस सकते हैं, जिसके चलते घोर गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या एक अरब पार कर जायेगी। इस महामारी ने जहां करोड़ों लोगों को संक्रमित किया है और लाखों लोगों की जान ली है, वहीं दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं को चौपट कर दिया है। वैश्विक पर्यटन जैसे उद्योग, जिससे करोड़ों लोगों की प्रत्यक्ष व परोक्ष जीविका जुड़ी हुई थी, उसे उबरने में सालों लग जायेंगे। दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाएं ही धराशायी हो गई हैं तो गरीब मुल्कों की क्या बिसात। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और डेनवर विश्वविद्यालय में ‘पारडी सेंटर फॉर इंटरनेशनल फ्यूचर’ के साझे अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है कि कोविड-19 के प्रभावों से उबरने के प्रयासों के चलते सतत विकास के लक्ष्यों को पाना कठिन होगा, जिसका आने वाले दशकों में बहुआयामी प्रभाव आम आदमी की आर्थिकी पर पड़ेगा। ऐसे में नुकसान के प्रभाव को कम करना इस बात पर निर्भर करेगा कि देश का नेतृत्व विकास की कैसी नीतियों का चुनाव करेगा।