Comprehension Passage

निर्देश (1-5) : नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए. कुछ शब्दों को मोटे अक्षरों में मुद्रित किया गया है, जिससे आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलेगी. दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त का चयन कीजिए. 

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे - मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए. ढलते सूरत के साथ बौद्ध-स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बडे़ हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध-स्तूप की छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बडे़ न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। 
स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे. तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध-विहार में विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी। दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता. पर मात्राओं को घटाते बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था - लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूंही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए। 
 
लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लैपटॉप रखे हुए है; लैपटॉप की पीठ उसके मुडे़ हुए घुटनों पर टिकी हुई है। आंखें बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई हैं, वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है. काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था. वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी स्मृतियों में कैद कर लेना चाहता था. पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा. समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखों में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था. लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं. क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है? वह उठ कर बैठ गया और चलहकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे. अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है. यहां अशांति है ,कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

हवा को हवा की तरह पहचानना क्यों मुश्किल था? 

1
कई कुछ एक साथ था 
2
हवा चल नहीं रही थी 
3
हवा तेज थी धूप मंद
4
धूप तेज थी हवा मंद 

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