छन्द का नाम बताएं:
'कोउ पापिह पँचत्व, प्राप्त सुनि जमगन धावत |
बनि बनि बावन बीर, बढ़त चौचंद मचावत ||
पै तकी ताकी लोथ, त्रिपथगा के तट लावत |
नौ व्दै ग्यारह होत, तीन पाँचहिं बिसरावत ||'
1
रोला छन्द
2
हरिगीतिका छन्द
3
उल्लाला छन्द
4
गीतिका छन्द
छन्द का नाम बताएं:
'कोउ पापिह पँचत्व, प्राप्त सुनि जमगन धावत |
बनि बनि बावन बीर, बढ़त चौचंद मचावत ||
पै तकी ताकी लोथ, त्रिपथगा के तट लावत |
नौ व्दै ग्यारह होत, तीन पाँचहिं बिसरावत ||'