Comprehension Passage

निम्नलिखित गदयांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और प्रश्न के उत्तर दीजिये:

मैं स्वप्न नहीं देखा करता। मैं एक व्यवहारी आदर्शवादी होने का दावा करता हूँ। अहिंसा का धर्म केवल ऋषियों और महात्माओं के लिए नहीं है। वह जनसाधारण के लिए भी है। जिस तरह से हिंसा पशुओं का जीवन सिद्धांत है, उसी तरह अहिंसा हम मानवों का। पशु में आत्मा सुप्त पड़ी रहती है और पशु शारीरिक बल के अतिरिक्त और कोई नियम नहीं जानता। मनुष्य की मर्यादा के लिए एक उच्च नियम - आत्मिक शक्ति - के प्रति आज्ञाकारिता आवश्यक है। इसीलिए मैंने भारत के सामने आत्म-त्याग का पुराना सिद्धांत रखने का साहस किया है। सत्याग्रह और उसकी शाखाएं - असहयोग और सविनय अवज्ञा और कुछ नहीं, बल्कि कष्ट सहन के नाम हैं। जिन ऋषियों ने हिंसा के बीच अहिंसा के सिद्धांत का पता लगाया वे न्यूटन से भी अधिक प्रतिभा-सम्पन्न थे; वेलिंगटन से भी बड़े योद्धा थे। शस्त्रों के प्रयोग को स्वयं जानकार भी उन्होंने उनकी निरर्थकता को समझा और इस थके हुए संसार को सिखाया कि मुक्ति हिंसा नहीं, बल्कि अहिंसा के द्वारा ही मिल सकती है।

गद्यांश से यह निष्कर्ष निकलता है कि मानव को-

1
साधारण-जन बनना चाहिए
2
ऋषि बनना चाहिए
3
अहिंसक बनना चाहिए
4
प्रतिभा-संपन्न वैज्ञानिक बनना चाहिए

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