उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दें।
जब प्राचीन भारत की ओर आँख उठाकर देखते हैं तो एक अजीब किस्म का करिश्मा सब ओर अठखेलियाँ करता हुआ दिखाई पड़ता है। ऐसा कहने वाले कि हिंदुस्तानी जन्म से आध्यात्मिक होते हैं, असल में कहना चाहते हैं कि हिंदुस्तानी जन्म से दरिद्र और अतृप्त होते हैं। प्राचीन भारत को देखिए और आपकी आँख खुल जाएगी। हिंदुस्तान जब समृद्ध था तभी उसके यहाँ अध्यात्म भी अपनी अंतिम चोटी पर पहुँचा। हिंदुस्तान में जब वेदांत सूत्र लिखा गया तब कामसूत्र रचा जा चुका था। हिंदुस्तान में जब तुलसी और सूर पैदा हुए तब भुवनेश्वर और खजुराहो के मंदिर बन चुके थे। हिंदुस्तानी अध्यात्म ने कभी भी भौतिक आनंद की गहराइयों में उतरने से हिंदुस्तानी को रोका नहीं। क्योंकि हिंदुस्तान की आत्मा की यह विशेषता है कि वह जीवन के खूब जरूरी दो अतिवादी छोरों के बीच अच्छा समन्वय कर लेती है। हिंदुस्तानी न सिर्फ भौतिक मधु को लगातार इकट्ठा करता रहा, बल्कि उसे उपभोग में लाने के सूक्ष्म तरीके खोजता रहा। इस मधु का आस्वादन कितनी मुद्राओं और कितने आसनों से संभव है, उससे पूछ लीजिए। पुराना हिंदुस्तानी इसीलिए कम से कम सौ शरद जीने की कामना करता था ताकि वह इस मधु का छककर पान कर सके। जब से आधुनिकता आई है न रस रहा, न मधु। एक हवस बच गयी हैजो बेशुमार छटपटाहटों से भरी हुई है।
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प्राचीन भारत की मुख्य रूप से विशेषता क्या थी? निम्नलिखित विकल्पों में से सबसे उचित एवं सार्थक उत्तर चुनें।