उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दें।
कविता एक बने-बनाये शिल्प और आजमाये हुए तौर-तरीकों वाली रचना का नाम नहीं है। कविता व्यावहारिक जीवन में एक वैचारिक प्रयोग भी है। यह प्रयोग केवल राजनीतिक सिद्धांतों की सामाजिक परिणति की अभिव्यक्ति के ही काम नहीं आता बल्कि जीवन की सभी उच्चताओं और निम्नताओं का पीछा कर उन्हें अनुभूति का ही नहीं अभिव्यक्ति का भी विषय बनाने के काम आता है। कविता के प्रयोग, भाषा की ही समृद्धि नहीं बढ़ाते बल्कि वे संवाद के अर्थ और सौंदर्य को भी बढ़ाते हैं। सारी दुनिया कविता का विषय हो सकती है यह कवि की दृष्टि पर निर्भर करता है। कविता में पहला अनुभवकर्ता, पहला स्रष्टा और पहला दृष्टा एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसे कवि भी कहा जाता है। यह समाज के स्वाध्याय से पायी हुई भाषा का कायाकल्प करता रहता है।
कविता किस प्रकार का प्रयोग है?