एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पो में से सही विकल्प चुने।
आज का युग प्रौद्योगिकी, सूचना तथा संचार का युग है। सूचना प्रौद्योगिकी, तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सूचनाओं का संकलन तथा सम्प्रेषण करता है। सूचना प्रौद्योगिकी में कम्प्यूटर का महत्त्व अवर्णनीय है। आज के युग में कम्प्यूटर के द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो नई क्रान्ति हुई है, वह है- यान्त्रिकी और कम्प्यूटर की नई भाषाई माँगों को पूरा करना । इन नई भाषाओं में हिन्दी का भी अपना विशेष महत्त्व है। हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। हिन्दी की शब्द -सम्पदा का नित विस्तार होने से कम्प्यूटर और हिन्दी एक-दूसरे के पूरक हो गए हैं। धीरे-धीरे अन्य देशों में हिन्दी के पठन-पाठन और प्रचार-प्रसार में तेजी से वृद्धि हुई है। दूर संचार के माध्यमों ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। चूँकि हिन्दी भाषा का व्याकरण वैज्ञानिक है, इसलिए देवनागरी लिपि कम्प्यूटर के लिए अनुकूल है। कम्प्यूटर युग में हिन्दी के प्रयोग की सम्भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक विभाग ने भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी विकास के अन्तर्गत विभिन्न परियोजनाओं को शुरू किया है।
आज विण्डोज प्लेटफार्म में कार्य करने वाले हिन्दी के अनेक सॉफ्टवेयर बाज़ार में उपलब्ध हैं, जैसे-सी डैक, लीप ऑफिस, अक्षर फॉर विण्डोज आदि। हिन्दी भाषा में वेब पेज विकसित करने के लिए प्लग इन पैकेट तैयार किया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति या संस्था अपना वेब पेज हिन्दी में प्रकाशित कर सकता है।
कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट के परस्पर सहयोग से हिन्दी भाषा का प्रसार तीव्र गति से होने की सम्भावनाएँ बढ़ गई हैं। माइक्रोसॉफ्ट, रेडिफ, गूगल, याहू आदि विदेशी कम्पनियाँ अपनी वेबसाइट पर हिन्दी भाषा को स्थान दे रही हैं। इण्टरनेट सेवा के अन्तर्गत ई-मेल, वॉइस मेल आदि के कारण हिन्दी भाषा के विकास व सम्प्रेषण की सम्भावनाएँ बढ़ गई हैं। हिन्दी वर्ड नेट पर हिन्दी शब्दों के एक विशाल भण्डार को विकसित किया गया है।
निष्कर्षतः हिन्दी और कम्प्यूटर को जोड़ने के काफी प्रयास किए जा रहे हैं, परन्तु अभी भी हिन्दी तकनीकी के दृष्टिकोण से पूर्णरूपेण विकसित नहीं है। अतः इस क्षेत्र में अभी युद्ध स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे हिन्दी के प्रचार- प्रसार में वैश्विक रूप से महत्त्वपूर्ण वृद्धि की जा सके।