Comprehension Passage
निर्देश: नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
समकालीन साहित्य को शुक्ल जी देखने- परखने के बाद ही स्वीकार करते थे। समकालीन काव्यधारा में श्रीधर पाठक द्वारा प्रवर्तित स्वच्छंदतावाद को हिन्दी का अपना बनाया हुआ मार्ग समझते थे। “छायावाद' को वे रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं के अनुकरण पर चलनेवाली प्रवृत्ति और चित्रात्मक भाषा-शैली तथा कक्षणा का प्रगल्भ विकास मानते थे। छायाबादी प्रबंध काव्यों के दवारा उसकी 'भाव-भूमि' विस्तार का स्वागत करते थे। छायावादी कवियों में पंत उन्हें कदाचित् सर्वाधिक प्रिय थे। वे यूरोपीय साहित्य की पर्याप्त जानकारी रखते थे। अपने लेखन में उन्होंने समकालीन विदेशी साहित्य पर निहायत आत्मविश्वास परक एवं विश्वसनीय टिप्पणी की है।
शुक्ल जी छायावाद को किसकी कविताओं के अनुकरण-प्रवृत्ति का विकास मानते थे ?
1
सुमित्रानंदन पंत
2
रविन्द्रनाथ टैगोर
3
जयशंकर प्रसाद
4
श्रीधर पाठक